भारतीय संगीत जगत के लिए आज का दिन एक युग के अंत जैसा है। सुरों की जादूगरनी और अपनी आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली Asha Bhosle जी। रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। सीने में संक्रमण (Chest Infection) के चलते उन्हें शनिवार रात भर्ती कराया गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
Asha Bhosle Passes Away: 10 साल की उम्र से शुरू हुआ 82 साल का सुरीला सफर
आशा भोसले का जाना न केवल बॉलीवुड बल्कि विश्व संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। 10 साल की नन्हीं उम्र में अपना पहला मराठी गाना ‘चला चला नव बाड़ा’ गाने वाली आशा जी का सिंगिंग करियर 82 साल लंबा रहा। इस दौरान उन्होंने 20 भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाकर अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया।
उनकी आवाज की सबसे बड़ी खासियत उनकी ‘वर्सेटैलिटी’ थी। जहाँ उन्होंने ‘दम मारो दम’ जैसे पॉप गानों से युवाओं को थिरकाया, वहीं ‘इन आंखों की मस्ती के’ जैसी गजलों से शास्त्रीय संगीत में अपनी महारत साबित की। Asha Bhosle जी मृत्यु की खबर सुनते ही संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
रिजेक्शन और संघर्ष: जब स्टूडियो से यह कहकर निकाल दिया गया कि ‘गला खराब है’

पंचम दा के साथ रिहर्सल करतीं आशा भोसले
आज भले ही दुनिया उनकी आवाज की दीवानी है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपमान सहना पड़ा था। 1947 में जब वे किशोर कुमार के साथ एक गाना रिकॉर्ड करने गईं, तो रिकॉर्डिस्ट ने म्यूजिक डायरेक्टर से बंगाली में कहा कि इन दोनों का गला खराब है, किसी और को बुलाओ।
उन्हें स्टूडियो से निकाल दिया गया, लेकिन आशा जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने किशोर दा से कहा था कि हमारी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। आगे चलकर उन्होंने उसी रिकॉर्डिस्ट के सामने अपनी सफलता का परचम लहराया।
निजी जिंदगी का दर्द: 16 की उम्र में घर से भागकर शादी और घरेलू हिंसा
आशा जी का जीवन जितना सुनहरी चमक से भरा दिखता था, उसके पीछे उतना ही गहरा संघर्ष था। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से भागकर शादी कर ली थी। इस फैसले ने उन्हें परिवार से दूर कर दिया।
ससुराल में उन्हें खुशियां नहीं मिलीं; उन्हें घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। 1960 में जब वे गर्भवती थीं, उन्हें घर से निकाल दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश के लिए गायकी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
ओपी नैयर और आरडी बर्मन: संगीत की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव

मोहम्मद रफी (बाएं) के साथ बीच में ओपी नैयर और आशा भोसले
आशा जी के जाने के बाद उन संगीतकारों का जिक्र भी जरूरी है जिन्होंने उनकी आवाज को पहचाना। ओपी नैयर ने उनकी आवाज की उस ‘खनक’ को दुनिया के सामने पेश किया, जिसने उन्हें लता मंगेशकर के साये से बाहर निकाला। वहीं आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने भारतीय संगीत में रॉक, जैज और कैबरे का तड़का लगाया। पंचम दा से उनकी शादी और फिर उनका साथ टूटना, आशा जी के जीवन का एक भावुक हिस्सा रहा।
उपलब्धियां और सम्मान: 100 से ज्यादा प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स
आशा भोसले के नाम उपलब्धियों का एक लंबा अंबार है।
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: 2011 में दुनिया की सबसे अधिक रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार।
- पद्म विभूषण: 2008 में भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- दादा साहब फाल्के: साल 2000 में सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान।
- फिल्मफेयर: 9 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जीते, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को नॉमिनेशन से अलग कर लिया ताकि नए सिंगर्स को मौका मिल सके।
करियर का आखिरी गाना और ग्लोबल पहचान
हैरानी की बात यह है कि 92 साल की उम्र तक उनकी आवाज में वही ताजगी बनी रही। उनका आखिरी गाना मार्च 2026 में ब्रिटिश वर्चुअल बैंड ‘गोरिल्लाज’ की एल्बम ‘द माउंटेन’ के लिए रिलीज हुआ था। संगीत के साथ-साथ वे एक बेहतरीन कुक भी थीं और ‘Asha’s’ नाम से उनकी रेस्टोरेंट चेन दुनिया भर में मशहूर है।

इस एल्बम के पोस्टर में आशा हरी रंग की साड़ी में खड़ी दिखाई दे रही हैं।
आशा जी की आवाज हमेशा हमारे बीच गूंजती रहेगी। वे केवल एक गायिका नहीं, बल्कि संघर्ष और जीवटता की मिसाल थीं। (सच का समय न्यूज़)

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