वॉशिंगटन: अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने आज, 2 अप्रैल 2026 को अपना ऐतिहासिक Artemis II Mission सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहली बार है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा को छोड़कर चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है।
इस मिशन के जरिए 4 अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाकर सुरक्षित धरती पर लौटेंगे, जो भविष्य में चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4:05 बजे नासा के सबसे शक्तिशाली रॉकेट ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ने ओरियन स्पेसक्राफ्ट के साथ गर्जना करते हुए उड़ान भरी। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए हजारों की भीड़ जुटी थी। आर्टेमिस-II मिशन की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि आखिरी समय में बैटरी और सेफ्टी सिस्टम में सुधार के बाद इसे हरी झंडी मिली थी।

आर्टेमिस-II मिशन के तहत चांद की ओर रवाना होता नासा का SLS रॉकेट)
आर्टेमिस-II मिशन के 4 जांबाज यात्री: पहली बार चांद के करीब पहुंचेगी महिला
इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका विविधतापूर्ण क्रू है। आर्टेमिस-II मिशन के तहत पहली बार कोई महिला और अश्वेत व्यक्ति चंद्रमा के करीब पहुंचेंगे:

लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन
- रीड वाइजमैन (कमांडर): अमेरिकी नौसेना के अनुभवी पायलट और मिशन की कमान संभालने वाले।
- क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट): अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला का रिकॉर्ड रखने वाली इंजीनियर।
- जेरेमी हैनसन (कनाडा): चांद की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी नागरिक।
- विक्टर ग्लोवर (पायलट): चंद्रमा के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।
तकनीकी चुनौतियां और ‘टेस्ट ड्राइव’
लॉन्चिंग से ठीक एक घंटा पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में आई खराबी ने इंजीनियरों की धड़कनें बढ़ा दी थीं, लेकिन समय रहते इसे सुलझा लिया गया। उड़ान के दौरान कुछ समय के लिए ओरियन कैप्सूल का संपर्क टूट गया था, जिसे बाद में बहाल कर लिया गया।
पायलट विक्टर ग्लोवर ने अंतरिक्ष में पहली बार ओरियन कैप्सूल की मैनुअल टेस्ट ड्राइव की। उन्होंने मिशन कंट्रोल को “ग्रेट फ्लाइंग विद यू ह्यूस्टन” कहकर धन्यवाद दिया, जो एक भावुक पल था। अब यात्री अपने ऑरेंज सूट उतारकर आरामदायक कपड़ों में हैं और चंद्रमा की कक्षा की ओर बढ़ रहे हैं।
मिशन का मुख्य उद्देश्य: क्या चांद पर बसेंगे इंसान?
नासा का आर्टेमिस-II मिशन केवल एक चक्कर लगाने तक सीमित नहीं है। इसका प्राथमिक लक्ष्य ओरियन स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की बारीकी से जांच करना है। नासा यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सुदूर अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए स्थितियां कितनी सुरक्षित हैं। यह मिशन ‘आर्टेमिस-III’ के लिए आधार तैयार करेगा, जिसमें इंसान वास्तव में चांद की सतह पर कदम रखेंगे।
अपोलो बनाम आर्टेमिस: क्या है बुनियादी अंतर?
70 के दशक का अपोलो मिशन मुख्य रूप से ‘स्पेस रेस’ जीतने के लिए था। इसके विपरीत, आर्टेमिस-II मिशन और पूरा आर्टेमिस प्रोग्राम चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाने की योजना है। नासा चांद का इस्तेमाल एक ‘लॉन्च पैड’ के रूप में करना चाहता है ताकि भविष्य में मंगल (Mars) ग्रह तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सके।
नासा का आर्टेमिस-II मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं है, बल्कि यह मंगल ग्रह (Mars) तक पहुँचने की सीढ़ी है। इसके बारे में कुछ ऐसी दिलचस्प बातें हैं जो इसे पिछले ‘अपोलो’ मिशनों से अलग और बहुत खास बनाती हैं:
1. पृथ्वी से अब तक की सबसे लंबी दूरी
यह मिशन इंसानों को पृथ्वी से इतनी दूर ले जाएगा, जहाँ वे आज तक कभी नहीं पहुँचे। ये चारों अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के पीछे की तरफ (Far Side of the Moon) से गुजरेंगे। पृथ्वी से उनकी अधिकतम दूरी लगभग 4,00,000 किलोमीटर से भी ज्यादा होगी।
2. चंद्रमा का ‘फ्री रिटर्न’ ट्रेजेक्टरी
इस मिशन की सबसे खास बात इसकी गति और रास्ता है। यान चंद्रमा के चारों ओर एक ‘फ्री रिटर्न’ रास्ते पर चलेगा। इसका मतलब है कि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण (Gravity) ही यान को खींचकर वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। इसमें बहुत कम ईंधन खर्च होगा, जिससे यह काफी सुरक्षित माना जा रहा है।
3. अंतरिक्ष में ‘लाइफ सपोर्ट’ की अग्निपरीक्षा
चूंकि यह 10 दिन का मिशन है, नासा पहली बार असली अंतरिक्ष (Deep Space) में अपने ओरियन कैप्सूल के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ को चेक करेगा।
- क्या वहां ऑक्सीजन लेवल स्थिर रहता है?
- क्या टॉयलेट सिस्टम सही काम करता है?
- क्या रेडिएशन से बचाव के इंतजाम पर्याप्त हैं?इन सब सवालों के जवाब इसी मिशन से मिलेंगे।
4. भविष्य का ‘लूनर गेटवे’ (Moon Station)
आर्टेमिस मिशन का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा के चारों ओर एक छोटा स्पेस स्टेशन बनाना है, जिसे ‘गेटवे’ कहा जाएगा। आर्टेमिस-II के दौरान अंतरिक्ष यात्री उस जगह की भी रेकी (Mapping) करेंगे जहाँ भविष्य में यह स्टेशन बनाया जाना है।
5. वापसी का रोमांचक पल (Splashdown)
10 दिन बाद जब यह यान धरती पर लौटेगा, तो इसकी रफ्तार 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। पृथ्वी के वायुमंडल में घुसते ही इसका बाहरी हिस्सा 2,800°C तक गर्म हो जाएगा। अंत में, यह प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में पैराशूट के जरिए ‘स्प्लैशडाउन’ (पानी में लैंडिंग) करेगा।
मिशन की टाइमलाइन पर एक नज़र:
| दिन | मुख्य गतिविधि |
| दिन 1-2 | पृथ्वी की ऊंची कक्षा में चक्कर लगाना और सिस्टम चेक करना। |
| दिन 3-4 | चंद्रमा की ओर प्रस्थान (Trans-Lunar Injection)। |
| दिन 5-7 | चंद्रमा के पीछे से गुजरना और अद्भुत तस्वीरें लेना। |
| दिन 8-9 | पृथ्वी की ओर वापसी का सफर। |
| दिन 10 | प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग। |
2028 में सतह पर उतरने की तैयारी
आर्टेमिस-II की सफलता के बाद अगला लक्ष्य साल 2028 है, जब आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद की मिट्टी पर चलेगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें इन 4 यात्रियों पर टिकी हैं जो 10 दिनों बाद एक नया इतिहास रचकर वापस लौटेंगे।

