नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब भारतीय करेंसी पर दिखने लगा है। सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.22 के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर पहुँच गया। हालांकि, दिन के अंत में रिजर्व बैंक (RBI) के दखल और बाजार की हलचल के बाद यह 94.78 पर बंद हुआ। Rupee Record Low vs Dollar की यह गिरावट इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में आयात (Import) होने वाली हर चीज की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
क्यों टूट रहा है रुपया? (मुख्य कारण)
कच्चा तेल $115 के पार: भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाता है। खाड़ी देशों में युद्ध के हालात के कारण ब्रेंट क्रूड $115 प्रति बैरल के पार चला गया है, जिसके लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की निकासी: अकेले मार्च महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट: इस समुद्री रास्ते से दुनिया का 20% और भारत का आधा तेल गुजरता है। युद्ध के कारण यहाँ सप्लाई रुकने के डर ने डॉलर की डिमांड बढ़ा दी है।

होर्मुज स्ट्रेट इस वक्त युद्ध का अखाड़ा बना हुआ है
रुपए की गिरावट❓: 10 सवाल-जवाब में समझें पूरा गणित
सवाल 1: रुपए में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
जवाब: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।
सवाल 2: इस वित्त वर्ष में रुपया कितना गिरा है?
जवाब: केवल एक महीने में रुपया 4% और पूरे वित्त वर्ष में 10% से ज्यादा टूट चुका है।
सवाल 3: विदेशी निवेशकों (FIIs) का इसमें क्या रोल है?
जवाब: अनिश्चितता के डर से निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ा है।
सवाल 4: रिजर्व बैंक (RBI) इस गिरावट को रोकने के लिए क्या कर रहा है?
जवाब: RBI ने बैंकों के लिए डॉलर रखने की सीमा घटा दी है, जिससे बैंकों को बाजार में डॉलर बेचने पड़ेंगे और रुपए को मजबूती मिलेगी।
सवाल 5: क्या इससे देश की GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा?
जवाब: हाँ, एनर्जी की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ाएंगी, जिससे विकास दर (GDP) कम हो सकती है।
सवाल 6: आम आदमी की जेब पर क्या असर होगा?
जवाब: आयातित मोबाइल, लैपटॉप, सोना-चांदी और कच्चा तेल महंगा होगा। साथ ही विदेश में पढ़ाई भी महंगी हो जाएगी।
सवाल 7: क्या रुपए के गिरने से किसी को फायदा भी होता है?
जवाब: हाँ, निर्यातकों (Exporters) को। IT सेक्टर, फार्मा और कपड़ा उद्योग की कंपनियों को डॉलर के बदले अब ज्यादा रुपए मिलेंगे।
सवाल 8: आने वाले दिनों में रुपए की चाल कैसी रहेगी?
जवाब: एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो रुपया 98 के स्तर को भी छू सकता है।
सवाल 9: ‘होर्मुज रूट’ का रुपए से क्या लेना-देना है?
जवाब: यहाँ से भारत का आधा तेल आता है। सप्लाई में रुकावट की आशंका मात्र से डॉलर महंगा हो जाता है।
सवाल 10: करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
जवाब: यह मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में ‘डिमांड और सप्लाई’ पर निर्भर करती है। डॉलर की मांग बढ़ेगी तो रुपया गिरेगा।
💡 ‘सच्च का समय’ विशेष विश्लेषण:
डॉलर के मुकाबले रुपया नीचे क्यों जा रहा है केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय की बचत पर सीधा हमला है। जब रुपया गिरता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता है, जिससे देश का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) भी बढ़ता है। सरकार और RBI के लिए यह ‘अग्निपरीक्षा’ का समय है क्योंकि उन्हें महंगाई और विकास दर के बीच संतुलन बनाना होगा। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो आम जनता को लंबे समय तक ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।”

