Pakistani camera on Sonipat railway station

Sonipat Railway Station Security Breach:सोनीपत रेलवे स्टेशन पर ‘पाकिस्तानी आंख’! चांदनी चौक से कैमरा खरीद पोल पर लगाया; 18 दिन तक सरहद पार जाती रही लाइव फुटेज

सोनीपत/हरियाणा: देश की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उस वक्त उड़ गई जब सोनीपत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 के पास एक हाई-वोल्टेज पोल पर खुफिया कैमरा लगा मिला। यह कोई मामूली कैमरा नहीं था, बल्कि इसके तार सीधे सरहद पार पाकिस्तान से जुड़े होने की आशंका है। Sonipat Railway Station Security Breach का यह मामला इतना गंभीर है कि अब इसमें NIA और IB जैसी बड़ी एजेंसियां कूद पड़ी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हमारे अपने ही देश के कुछ युवक चंद रुपयों के लालच में आकर इस देशविरोधी साजिश का हिस्सा बन गए।

📦 चांदनी चौक से खरीदारी और रातों-रात ऑपरेशन

जांच में जो कहानी सामने आई है, वह किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। गाजियाबाद के रहने वाले आरोपी प्रवीण और उसके तीन साथियों ने दिल्ली के चांदनी चौक बाजार से सोलर बेस्ड हाई-टेक ‘आईपी कैमरे’ (IP Cameras) खरीदे थे।

  • ट्रेन से सफर और टैक्सी से वापसी: 26 फरवरी को ये चारों आरोपी एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर सोनीपत पहुंचे।
  • मिशन पोल नंबर 42/27: रात के अंधेरे का फायदा उठाकर इन्होंने प्लेटफॉर्म नंबर 3 के पास पोल नंबर 42/27 पर कैमरा इंस्टॉल किया। इस काम में उन्हें करीब 4 से 5 घंटे लगे। काम पूरा करने के बाद वे टैक्सी लेकर वापस दिल्ली लौट गए। हैरानी की बात यह है कि 18 दिनों तक रेलवे पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

पाकिस्तानी हैंडलर और 10 हजार का लालच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी प्रवीण और उसके साथी करीब 10 दिन पहले एक पाकिस्तानी व्यक्ति के संपर्क में आए थे।

  • सस्ते में बिकी वफादारी: आरोपियों को एक कैमरा लगाने के बदले महज 10,000 रुपये देने का लालच दिया गया था।
  • फर्जी सिम कार्ड का खेल: अपनी पहचान छुपाने के लिए आरोपियों ने दूसरों के नाम पर फर्जी सिम कार्ड खरीदे थे। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कैमरे को इंटरनेट से जोड़ने और फुटेज पाकिस्तान भेजने के लिए किया जा रहा था।

🔍 18 दिन तक ‘लाइव’ रही सरहद पार की नजर

सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास पोल पर लगाए गए संदिग्ध खुफिया कैमरे को उतारती टीम

सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास पोल पर लगाए गए संदिग्ध खुफिया कैमरे को उतारती टीम

यह खुफिया कैमरा लगभग 18 दिनों तक सक्रिय रहा। जिस पोल पर इसे लगाया गया था, वहां से स्टेशन के पांचों प्लेटफॉर्म की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि इस दौरान रेल यातायात, सैन्य गतिविधियों या माल ढुलाई की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेजी गई है।


🚔 गाजियाबाद से गिरफ्तारी और सोनीपत में निशानदेही

आरोपी को घटना स्थल से लेकर जाते हुए गाजियाबाद पुलिस टीम

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को मुख्य आरोपी प्रवीण को कड़ी सुरक्षा के बीच सोनीपत रेलवे स्टेशन लाया गया।

एक्सपर्ट ने उतारा कैमरा: पुलिस और टेक्निकल एक्सपर्ट्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर निशानदेही की। एक्सपर्ट दो बार खंभे पर चढ़ा और तब जाकर उस ‘पाकिस्तानी आंख’ यानी कैमरे को नीचे उतारा गया।

लैब में जांच: अब इस कैमरे को लैब में भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह डेटा कहां-कहां भेज रहा था और इसका ‘एक्सेस’ किन-किन लोगों के पास था।

NIA और IB की एंट्री

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोर्चा संभाल लिया है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन आरोपियों की योजना अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी ऐसे ही कैमरे लगाने की थी। आरोपियों में से प्रवीण आरओ पानी सप्लाई करने वाली गाड़ी पर काम करता है, जिससे साफ है कि पाकिस्तान ने बहुत ही निचले स्तर पर लोगों को लालच देकर अपना मोहरा बनाया है।


‘सच्च का समय’ report

यह घटना हमें याद दिलाती है कि तकनीक जितनी हमारे काम की है, दुश्मन के लिए उतनी ही खतरनाक भी। चंद हजार रुपयों के लिए देश की सुरक्षा दांव पर लगा देना शर्मनाक है। रेलवे पुलिस को अपनी गश्त और तकनीकी निगरानी को और मजबूत करना होगा ताकि दोबारा ऐसी ‘खुफिया घुसपैठ’ न हो सके।