Indore Fire Tragedy

Indore Fire Tragedy: इंदौर में EV चार्जिंग के दौरान धमाका, जिंदा जले 8 लोग; डिजिटल लॉक नहीं खुलने से काल बना ‘आलीशान मकान’

इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लिए आज की सुबह काली साबित हुई। शहर की पॉश कॉलोनी ग्रेटर बृजेश्वरी में बुधवार तड़के एक भीषण अग्निकांड में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार (EV) को चार्ज किया जा रहा था। शॉर्ट सर्किट के बाद भड़की आग ने चंद मिनटों में तीन मंजिला मकान को अपनी आगोश में ले लिया। इस हादसे ने न केवल इंदौर को झकझोर दिया है, बल्कि मॉडर्न घरों में लगने वाले डिजिटल लॉक और सुरक्षा इंतजामों पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

🔥 कैसे हुआ यह भयानक हादसा?

घटना बुधवार तड़के 3:30 से 4:00 बजे के बीच की है। बंगाली चौराहे के पास रहने वाले रबर और पॉलीमर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर के बाहर इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी थी।

चार्जिंग पॉइंट में अचानक शॉर्ट सर्किट के बाद विस्फोट हुआ

शुरुआती धमाका: पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, चार्जिंग पॉइंट में अचानक शॉर्ट सर्किट के बाद विस्फोट हुआ। आग कार से फैलती हुई घर के अंदर तक पहुँच गई।

सिलेंडरों का ब्लास्ट

सिलेंडरों का ब्लास्ट: घर में रबर के पॉलीमर और ज्वलनशील केमिकल रखे थे, जिससे आग और भड़क गई। आग की तपिश ने घर में मौजूद 10 से ज्यादा गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। एक के बाद एक हुए सिलेंडरों के धमाकों से पूरा इलाका दहल गया और मकान का एक हिस्सा ढह गया।


काल बने ‘डिजिटल लॉक’: अंदर फँसे रह गए लोग

इस त्रासदी का सबसे डरावना पहलू यह रहा कि आलीशान घर की सुरक्षा के लिए लगाए गए ‘डिजिटल लॉक’ ही लोगों की मौत की वजह बन गए। आग लगते ही घर की बिजली सप्लाई बंद हो गई। बिजली कटते ही दरवाजे पर लगे इलेक्ट्रॉनिक लॉक जाम हो गए। अंदर सो रहे लोगों को भागने का मौका तक नहीं मिला। बचाव दल को जब सूचना मिली, तो उन्हें ग्रिल काटकर और दरवाजे तोड़कर अंदर घुसना पड़ा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


बिहार से इलाज कराने आए थे रिश्तेदार, मौत से हुआ सामना

हादसे में जान गंवाने वाले 8 लोगों में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन भी शामिल हैं। सबसे दुखद बात यह है कि मृतकों में 6 लोग मनोज के रिश्तेदार थे, जो महज एक दिन पहले (मंगलवार को) बिहार के किशनगंज से इंदौर आए थे। किशनगंज के कॉस्मेटिक कारोबारी विजय सेठिया को जबड़े का कैंसर था और वे इंदौर के बड़े अस्पताल में अपना ऑपरेशन कराने आए थे। उनके साथ उनकी पत्नी, बेटा, बहन और बहनोई भी थे। किसी ने नहीं सोचा था कि जिस शहर में वे नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आए हैं, वही उनकी अंतिम मंजिल बन जाएगा।

🚨 प्रशासन की कार्रवाई और चेतावनी

हादसे की जानकारी मिलते ही महापौर और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मौके पर पहुँचे।

  • एक्सपर्ट कमेटी का गठन: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह एक ‘अलार्मिंग सिचुएशन’ है क्योंकि दुनिया EV युग की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर को एक्सपर्ट कमेटी बनाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए SOP (Standard Operating Procedure) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
  • 7 शवों का पोस्टमॉर्टम: एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन के मुताबिक, अब तक 7 शवों का पोस्टमॉर्टम हो चुका है। 4 लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।

सबक: पिछले साल भी हुआ था ऐसा ही हादसा

इंदौर में डिजिटल लॉक की वजह से मौत का यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल अक्टूबर 2025 में कांग्रेस नेता प्रवेश अग्रवाल के घर भी मंदिर की ज्योति से आग लगी थी और डिजिटल लॉक न खुलने के कारण उनकी भी जान चली गई थी। यह बार-बार याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक के साथ ‘मैनुअल इमरजेंसी एग्जिट’ का होना कितना अनिवार्य है।

‘सच्च का समय’ की विशेष अपील

यह घटना हमें तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल पर सोचने को मजबूर करती है। ‘सच्च का समय’ अपने पाठकों से अपील करता है कि यदि आपके घर में डिजिटल लॉक या इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग पॉइंट है, तो सुरक्षा के मानकों (जैसे फायर एक्सटिंग्विशर और मैनुअल लॉक विकल्प) का विशेष ध्यान रखें। इंदौर के इस पीड़ित परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं।