पंचकूला: हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले एमबीबीएस छात्रों और सरकार के बीच ‘बॉन्ड पॉलिसी’ को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। Haryana MBBS Bond Policy को लेकर पंचकूला स्थित चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (DMER) के कार्यालय में हुई अहम बैठक बिना किसी ठोस लिखित समाधान के समाप्त हो गई। हालांकि अधिकारियों ने कुछ मुद्दों पर मौखिक आश्वासन जरूर दिए हैं, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर लिखित आदेश की जिद पर अड़े हुए हैं।
📍 बैठक में क्या हुआ? (Key Highlights of the Meeting)
हरियाणा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने पीजी बॉन्ड पॉलिसी और एमबीबीएस से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों और रोहतक हेल्थ यूनिवर्सिटी (UHS) के छात्र प्रतिनिधियों को बुलाया था।
- मौखिक आश्वासन: बैठक के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि छात्रों को फॉर्म भरने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी या फिजिकल कॉपी जल्द उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए कॉलेजों को निर्देश भी भेजे जा सकते हैं।
- लिखित आदेश का अभाव: छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि बैठक सकारात्मक तो रही, लेकिन जब तक कोई Haryana MBBS Bond Policy से जुड़ा लिखित ड्राफ्ट या आधिकारिक आदेश सामने नहीं आता, तब तक इसे समाधान नहीं माना जा सकता।
⚠️ छात्रों के सामने खड़ी बड़ी मुसीबत: UPSC और अन्य परीक्षाओं पर संकट
इस विवाद का सबसे बुरा असर छात्रों के करियर पर पड़ रहा है। दस्तावेजों के अभाव में छात्र भविष्य की योजनाओं और सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
- UPSC CMS परीक्षा: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैं और इसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 है। हरियाणा के छात्र आवेदन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स कॉलेजों के पास जमा हैं।
- हरियाणा मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन: कई छात्रों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज (HCMS) की परीक्षा पास कर ली है, लेकिन परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए जरूरी दस्तावेज न होने के कारण उनकी जॉइनिंग और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया रुकी हुई है।
📋 लंबित मांगे और विवाद के मुख्य बिंदु (Pending Issues)
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि Haryana MBBS Bond Policy में कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर अभी भी स्पष्टता की जरूरत है:
- सेवा अवधि और वेतनमान: पीजी के बाद सेवा की अवधि कितनी होगी और उस दौरान वेतन क्या मिलेगा, इस पर कोई लिखित ढांचा तैयार नहीं है।
- कार्यान्वयन ढांचा: बॉन्ड को लागू करने का प्रशासनिक तरीका क्या होगा?
- दस्तावेजों की वापसी: डिग्री पूरी होने के बाद छात्रों के मूल दस्तावेज वापस करने की समयसीमा क्या होगी?
छात्रों का कहना है कि वे सरकार के ‘बॉन्ड’ या सरकारी सेवा के खिलाफ नहीं हैं। वे हरियाणा की स्वास्थ्य व्यवस्था में योगदान देना चाहते हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि नियम ‘न्यायसंगत, व्यवहारिक और लिखित’ हों।
🗣️ “केवल बातों से नहीं चलेगा काम” – छात्र प्रतिनिधि
बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रस्तावित ‘पोस्ट पीजी बॉन्ड फ्रेमवर्क’ पर अभी कोई अंतिम राय नहीं दी गई है क्योंकि सरकार ने इसका कोई लिखित ड्राफ्ट साझा नहीं किया है। बिना लिखित दस्तावेज के किसी भी नीति पर सहमति देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
छात्रों का तर्क है कि मौखिक आश्वासनों का कानूनी रूप से कोई मूल्य नहीं होता, इसलिए जब तक निदेशालय की वेबसाइट पर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
💡 ‘सच्च का समय’ का विश्लेषण
हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ ये युवा डॉक्टर्स ही हैं। Haryana MBBS Bond Policy का विवाद सुलझना न केवल छात्रों के लिए बल्कि राज्य की आम जनता के लिए भी जरूरी है ताकि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पूरी हो सके। 31 मार्च की डेडलाइन (UPSC) को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द लिखित आदेश जारी कर छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए।

