जोधपुर: लद्दाख की ठंडी हवाओं के पैरोकार और दुनिया भर में अपने आविष्कारों के लिए मशहूर Sonam Wangchuk Released होकर अब आजाद हैं। करीब साढ़े पांच महीने (170 दिन) जोधपुर सेंट्रल जेल की तन्हाई में बिताने के बाद, शनिवार दोपहर सवा एक बजे वे अपनी पत्नी गीतांजलि के साथ जेल से बाहर निकले। उन पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) हटा लिया गया है, लेकिन उनके पीछे छूट गए हैं कई अनसुलझे सवाल और जेल की दीवारों के भीतर किए गए कुछ अनोखे प्रयोग।
🏡 जेल से बाहर आने का वो पल: भावुक हुई पत्नी गीतांजलि
शनिवार सुबह से ही जोधपुर सेंट्रल जेल के बाहर हलचल तेज थी। सुबह 10 बजे सोनम की पत्नी गीतांजलि अंगमो कागजी कार्रवाई के लिए जेल पहुँचीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब सोनम वांगचुक बाहर आए, तो उनके चेहरे पर वही पुरानी शांति थी। उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच जिले की सीमा से बाहर ले जाया गया। Sonam Wangchuk Released होने की खबर मिलते ही लद्दाख से लेकर राजस्थान तक उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
💡 जेल में भी नहीं थमा ‘3 Idiots’ वाला दिमाग: बैरक को ठंडा रखने का जुगाड़
सोनम वांगचुक की पहचान ही यह है कि वे मुश्किल हालातों में रास्ता खोज लेते हैं। जेल में रहने के दौरान उन्होंने सिर्फ समय नहीं काटा, बल्कि वहां भी अपनी वैज्ञानिक सोच का इस्तेमाल किया।
- इंजीनियरिंग का कमाल: जोधपुर की भीषण गर्मी को देखते हुए उन्होंने जेल प्रशासन के साथ मिलकर एक्सपेरिमेंट किया कि कैसे बिना महंगे संसाधनों के बैरक को ठंडा रखा जा सकता है।
- पेरेंटिंग टिप्स: इतना ही नहीं, जेल स्टाफ भी उनके ज्ञान का कायल हो गया। स्टाफ के कई सदस्यों ने उनसे बच्चों की बेहतर परवरिश और एजुकेशन के टिप्स लिए। उनकी पत्नी ने बताया कि वे जेल में भी सकारात्मक ऊर्जा से भरे हुए थे।
🚫 अमराराम से लेकर समर्थकों तक: मिलने पर रही सख्त पाबंदी
इन 170 दिनों में कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ।
- सांसद को भी रोका: सीकर सांसद अमराराम जब उनसे मिलने पहुँचे, तो भारी बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया गया।
- तिरंगे वाला युवक: गिरफ्तारी के अगले ही दिन चूरू का एक युवक विजयपाल तिरंगा लेकर जेल के बाहर पहुँच गया था, जिसे पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया था।
- तानाशाही के आरोप: सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 25 फरवरी को बड़ा प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार ने किसी को भी वांगचुक के करीब नहीं जाने दिया।
अशोक गहलोत का तीखा हमला: ‘170 दिनों का हिसाब कौन देगा?’
Sonam Wangchuk Released होने के तुरंत बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने ट्वीट कर पूछा कि जिस व्यक्ति को ‘देश के लिए खतरा’ बताकर NSA लगाया गया था, आज बिना किसी साक्ष्य के उन्हें रिहा क्यों किया गया? गहलोत ने इसे लोकतंत्र पर आघात और तानाशाही करार दिया।
⚖️ क्यों हुई थी गिरफ्तारी? (The Flashback)

यह पूरा मामला 2025 में शुरू हुआ था। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर वांगचुक आंदोलन कर रहे थे। 24 सितंबर 2025 को लेह में भड़की हिंसा (जिसमें 4 लोगों की मौत हुई थी) का आरोप उन पर लगा। सरकार ने उन्हें ‘पब्लिक ऑर्डर’ के लिए खतरा माना और 26 सितंबर को गिरफ्तार कर लेह से सीधे जोधपुर जेल भेज दिया।
✅ ‘सच्च का समय’ की राय: विचारों को कैद करना मुमकिन नहीं
सोनम वांगचुक की रिहाई यह साबित करती है कि आप किसी व्यक्ति को कैद कर सकते हैं, लेकिन उसके विचारों और सुधार की भावना को नहीं। जिस व्यक्ति ने लद्दाख के पर्यावरण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, उसके साथ ऐसा व्यवहार कई सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि अब सरकार और लद्दाख के नेताओं के बीच बातचीत का रास्ता खुलेगा।

