पंचकूला/चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों से हुए ₹590 करोड़ के गबन मामले में अब गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया है। इस घोटाले में चौंकाने वाला मोड़ यह आया है कि सरकार को 7 महीने पहले ही इसकी भनक लग गई थी, फिर भी इसे रोका नहीं जा सका।
ACB की बड़ी कार्रवाई: 4 गिरफ्तार
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस जालसाजी के मुख्य किरदारों को दबोच लिया है:
- गिरफ्तार आरोपी: मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति।
- जांच का विषय: अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि इनमें से कितने बैंक कर्मचारी हैं और कितने बाहरी एजेंट। सूत्रों के मुताबिक, कुछ IAS अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
ACS का वो ‘अलर्ट लेटर’ (जुलाई 2025)
हैरानी की बात यह है कि वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) ने जुलाई 2025 में ही सभी विभागों को पत्र लिखकर चेताया था। लेटर में साफ कहा गया था कि:
- विभाग बैंक खाते खोलने में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
- पंचकूला में हेड ऑफिस होने के बावजूद खाते चंडीगढ़ की ब्रांचों में खोले जा रहे हैं।
- एफडी (FD) करवाने में पारदर्शिता की कमी और पक्षपात के संकेत मिल रहे हैं।
कैसे होता था यह खेल? (3 मुख्य कड़ियाँ)
- कड़ी 1 (बैंक कर्मचारी): ये लोग बैंक के अंदर बैठकर फर्जी फर्मों के खाते खोलते थे और सरकारी फंड को इंटरनल तरीके से वहां ट्रांसफर कर देते थे।
- कड़ी 2 (प्राइवेट प्लेयर/दलाल): ये लोग सरकारी अफसरों को लालच देकर उन्हें पंचकूला की बजाय चंडीगढ़ की खास ब्रांचों में खाते खुलवाने के लिए मनाते थे। वहां से पैसा शेयर मार्केट में लगाया जाता था।
- कड़ी 3 (बड़े अफसर): नियमों को ताक पर रखकर चंडीगढ़ में खाते खुलवाने का ‘अनुमोदन’ (Approval) करने वाले अफसरों पर अब गाज गिरना तय है।
विधानसभा में CM का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सदन को जानकारी दी कि जनता का पैसा सुरक्षित है। IDFC फर्स्ट बैंक ने ब्याज समेत पूरी रकम (₹590 करोड़+) लौटा दी है। हालांकि, रिकवरी के बावजूद अपराधियों और लापरवाह अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।
हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन
राज्यपाल के आदेश पर अरुण कुमार गुप्ता (ACS, वित्त) की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है।
- काम: यह कमेटी जांच करेगी कि IDFC और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी पैनल में कैसे शामिल किया गया और किन अफसरों ने वहां पैसे जमा करने की अनुमति दी।
- डेडलाइन: कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए:
- घोटाले की राशि: ₹590 करोड़ (रिकवर हो चुकी है)।
- गिरफ्तारियां: 4 लोग (ACB की हिरासत में)।
- विवाद: पंचकूला मुख्यालय होने के बावजूद 18 विभागों के खाते चंडीगढ़ में क्यों थे?
- चेतावनी: जुलाई 2025 में ही वित्त विभाग ने इंटरनल ऑडिट के निर्देश दिए थे।
हमारा नजरिया: यह मामला सिर्फ पैसों की हेराफेरी का नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे ‘दीमकों’ का है। भले ही बैंक से पैसा वापस मिल गया हो, लेकिन उन चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है जिन्होंने सरकारी फंड को अपनी निजी जागीर समझकर उसे जोखिम में डाला।

