इस्लामाबाद/काबुल: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट (IS) के ठिकानों पर बमबारी की है। पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने 7 आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद किया, जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि इस हमले में एक ही परिवार के 16 निर्दोष लोग (महिलाएं और बच्चे) मारे गए हैं।
🔴 हमले की मुख्य वजह: आत्मघाती हमलों का बदला

पाकिस्तान में पिछले कुछ दिनों में आतंकी हमलों की बाढ़ आ गई है:
- 6 फरवरी: इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में ब्लास्ट, 31 मौतें।
- 16 फरवरी: बाजौर में आत्मघाती हमला, 11 सैनिकों की मौत।
- जुमे की नमाज: बन्नू में सुरक्षा काफिले पर हमला, जिसमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत दो सैनिक शहीद हुए।पाकिस्तान का आरोप: इन सभी हमलों के तार अफगानिस्तान में बैठे TTP नेटवर्क से जुड़े हैं। पाकिस्तान का कहना है कि हमलावर अफगान नागरिक थे।
📜 इतिहास की परतें: कैसे शुरू हुई यह जंग?
यह विवाद रातों-रात पैदा नहीं हुआ, इसके पीछे दशकों पुरानी कड़वाहट है:
- डूरंड लाइन विवाद: 1893 में अंग्रेजों द्वारा खींची गई सीमा रेखा को अफगानिस्तान कभी स्वीकार नहीं करता। यह रेखा पश्तून कबीलों को दो हिस्सों में बांटती है।
- TTP का उदय (2007): जब पाकिस्तान ने अमेरिका के ‘वॉर ऑन टेरर’ में साथ दिया, तो स्थानीय पश्तून कबीले नाराज हो गए। 2007 में बैतुल्लाह मेहसूद ने कई समूहों को मिलाकर TTP बनाया, जिसका मकसद पाकिस्तान में शरिया लागू करना और पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाना है।
- 2021 का टर्निंग पॉइंट: जब अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया, तो पाकिस्तान को लगा कि अब सीमा सुरक्षित होगी। लेकिन हुआ इसके उलट। अफगान तालिबान की जीत से TTP का हौसला बढ़ा और उन्हें अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह मिल गई।
⚠️ अब क्या नौबत आ गई? (Current Critical Situation)
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पाकिस्तान अब ‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स’ में दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन गया है।
- TTP का गुरिल्ला युद्ध: TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ सीधी जंग छेड़ रखी है। 2024 में उनके हमलों में 91% की वृद्धि हुई है।
- तालिबान की बेरुखी: पाकिस्तान लगातार मांग कर रहा है कि तालिबान अपनी जमीन का इस्तेमाल रोकने के लिए ‘दोहा समझौते’ का पालन करे, लेकिन तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है।
- सीधी सैन्य कार्रवाई: अक्टूबर 2025 में भी दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। अब पाकिस्तान ने ‘इंतजार की नीति’ छोड़कर ‘इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशंस’ के जरिए सीमा पार हमले शुरू कर दिए हैं।
⚔️ अफगानिस्तान की चेतावनी
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इस एयरस्ट्राइक को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और कहा है कि “सही समय पर पाकिस्तान को इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।”
📊 ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025: पाकिस्तान की स्थिति
| रैंकिंग | देश | मुख्य खतरा |
| 1 | बुर्किना फासो | IS / JNIM |
| 2 | पाकिस्तान | TTP / BLA / IS-K |
निष्कर्ष: पाकिस्तान के लिए TTP अब अस्तित्व का खतरा बन चुका है, वहीं अफगानिस्तान के साथ उसके रिश्ते ‘दुश्मनी’ के उस स्तर पर पहुँच गए हैं जहाँ से वापसी मुश्किल नजर आती है। यह एयरस्ट्राइक एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चिंगारी साबित हो सकती है।

