यूट्यूबर और बिग बॉस विजेता एल्विश यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

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एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: “फेमस होने का मतलब यह नहीं कि आप कानून से ऊपर हैं”, सांप के जहर मामले में फंसे यूट्यूबर!

नई दिल्ली: नोएडा रेव पार्टी और सांपों के जहर के सप्लाई मामले में फंसे मशहूर इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एल्विश की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई और चार्जशीट को चुनौती दी थी।

1. सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “बोलने में असमर्थ जीवों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं”

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एल्विश यादव को फटकार लगाते हुए कहा:

“यदि आपके जैसे प्रभावशाली व्यक्ति वन्यजीवों का दुरुपयोग करते हैं, तो यह समाज में बेहद गलत संदेश देता है। कोई भी व्यक्ति अपनी मनमर्जी से कानून की धज्जियां नहीं उड़ा सकता। आप इन ‘बोलने में असमर्थ’ बेजुबान प्राणियों का मनोरंजन के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते।”

2. एल्विश के वकील की दलील: “हम तो सिर्फ गेस्ट थे”

एल्विश यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट में सफाई दी कि:

  • एल्विश उन सांपों के मालिक नहीं थे और न ही किसी अवैध काम में शामिल थे।
  • वे सिंगर फाजिलपुरिया के एक म्यूजिक वीडियो शूट में केवल ‘गेस्ट’ के तौर पर गए थे।
  • दावा किया गया कि वीडियो में इस्तेमाल सांपों के जहर के दांत नहीं थे और प्रोडक्शन हाउस ने जरूरी अनुमति ली थी।

3. क्या है पूरा मामला? (Flashback)

  • नवंबर 2023: नोएडा पुलिस ने एक रेव पार्टी में छापेमारी की थी, जहाँ सांपों का जहर और कई दुर्लभ सांप बरामद हुए थे।
  • आरोप: आरोप लगा कि इन सांपों के जहर का इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता था।
  • एल्विश की गिरफ्तारी: इस मामले में एल्विश यादव को गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

4. प्रशासन का बड़ा दावा: “बरामद हुआ है असली जहर”

प्रशासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पुलिस ने मौके से कई सांप और जहर बरामद किया है। अब इसकी जांच हो रही है कि क्या इन सांपों के जहर को अवैध रूप से निकाला गया था। कोर्ट ने अब प्रॉसिक्यूशन से रिपोर्ट मांगी है कि क्या वाकई शूटिंग के लिए जरूरी परमिशन ली गई थी या नियमों को ताक पर रखा गया।


5. ‘वाइल्डलाइफ एक्ट’ के तहत हो सकती है कड़ी सजा

यह मामला Wildlife (Protection) Act, 1972 के तहत दर्ज है। अगर दोष सिद्ध होता है, तो इसमें जेल की सजा का कड़ा प्रावधान है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

Abhishek Ranga is the founder and editor-in-chief of Sach Ka Samay News. With a commitment to journalistic integrity, he focuses on delivering accurate, unbiased, and real-time news to the public. He oversees the digital strategy and content management for the portal, ensuring that every story meets the highest standards of reporting