“दुनिया की सबसे बड़ी AI समिट” का दावा करने वाले इवेंट के पहले ही दिन भारत मंडपम में जो हुआ, उसने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। 70 हजार लोगों की भीड़ और सुरक्षा के नाम पर किए गए ‘VIP तामझाम’ ने उन लोगों को ही प्रताड़ित किया, जो भारत का भविष्य बना रहे हैं।
1. स्टार्टअप फाउंडर्स का छलका दर्द: “हमारे ही स्टॉल से हमें भगा दिया”
समिट में आए ‘नियो सेपियन’ के CEO धनंजय यादव और कई अन्य एग्जिबिटर्स ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से पहले सुरक्षा के नाम पर उन्हें उनके ही पेड स्टॉल्स (जिसके लिए उन्होंने पैसे दिए थे) से बाहर निकाल दिया गया।
- बड़ी लापरवाही: जब सुरक्षा घेरे के नाम पर फाउंडर्स को बाहर किया गया, तब उनके कीमती AI गैजेट्स और वियरेबल्स चोरी हो गए। 4000 कैमरों की निगरानी के बावजूद चोरी होना ‘सिक्योरिटी लैप्स’ पर बड़े सवाल खड़ा करता है।
2. हाई-टेक समिट में ‘सभ्यता’ की कमी: कैश पेमेंट और नो इंटरनेट
दुनिया सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गजों को सुनने आई थी, लेकिन वहां का बुनियादी ढांचा जवाब दे गया:
- डेमो हुए फेल: पैची वाई-फाई और खराब मोबाइल नेटवर्क की वजह से कई स्टार्टअप अपने AI प्रोडक्ट्स का डेमो तक नहीं दे पाए।
- भूखे रहे डेलीगेट्स: डिजिटल इंडिया के दौर में इस टेक इवेंट में पेमेंट मोड सिर्फ कैश रखा गया। ऑनलाइन पेमेंट न होने से कई एग्जिबिटर्स और डेलीगेट्स दिनभर भूखे-प्यासे रहे।
- अजीब पाबंदियां: AI और टेक इवेंट होने के बावजूद अंदर लैपटॉप, बैग और कैमरा ले जाने पर बैन था, जिससे काम करना असंभव हो गया।
3.विपक्ष का तीखा हमला: “सिर्फ फोटो खिंचवाने की भूख”
विपक्ष ने इस अव्यवस्था को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी के ‘रील और फोटो’ के शौक ने देश की अंतरराष्ट्रीय इमेज को नुकसान पहुँचाया है। स्टार्टअप फाउंडर्स को घंटों धूप में कतारों में खड़ा रखा गया ताकि अंदर ‘VIP मूवमेंट’ सुचारू रहे।
4. आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की ‘माफी’ और वॉर रूम
भारी आलोचना के बाद आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दूसरे दिन (17 फरवरी) स्वीकार किया कि भीड़ उम्मीद से कहीं ज्यादा (70 हजार) थी। उन्होंने अव्यवस्था के लिए माफी मांगते हुए एक ‘वॉर रूम’ बनाने की बात कही है जो 24 घंटे हालात की निगरानी करेगा।
सुरक्षा का भारी-भरकम दिखावा:
एक तरफ सामान चोरी हुआ, तो दूसरी तरफ सुरक्षा के नाम पर फौज खड़ी कर दी गई थी:
- 15 हजार जवान और 4 हजार AI-इनेबल्ड कैमरे।
- फेस रिकग्निशन सिस्टम और एंटी-ड्रोन गन।
- पुलिस ने इसे G20 स्तर की सुरक्षा बताया, लेकिन हकीकत में डेलीगेट्स मैनेजमेंट पूरी तरह फेल रहा।
तकनीक तब सफल होती है जब वह इंसान के काम आए, न कि उसे परेशान करे। अगर भारत को ग्लोबल टेक हब बनना है, तो हमें ‘VIP कल्चर’ से ऊपर उठकर उन ‘इनोवेटर्स’ को सम्मान देना होगा जो असल में इस समिट की जान हैं।

