देशभर में भारी विरोध और कानूनी चुनौतियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित नए नियमों (Equity Regulations, 2026) पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कड़े शब्दों में कहा कि इन नियमों के प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की 4 तीखी टिप्पणियां: “भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए”
सुनवाई के दौरान CJI ने केंद्र सरकार और UGC से कई गंभीर सवाल पूछे:
- अलग हॉस्टल पर आपत्ति: CJI ने अलग-अलग जातियों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव पर नाराजगी जताते हुए कहा, “भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए। हम एक जातिविहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं, क्या अब हम फिर से पीछे जाना चाहते हैं?”
- भेदभाव की परिभाषा: कोर्ट ने पूछा कि जब ‘भेदभाव’ की सामान्य परिभाषा पहले से मौजूद है, तो केवल ‘जाति-आधारित भेदभाव’ को ही अलग से परिभाषित क्यों किया गया?
- रैगिंग पर चुप्पी: कोर्ट ने सवाल उठाया कि कैंपस की सबसे बड़ी समस्या ‘रैगिंग’ को इन नियमों में शामिल क्यों नहीं किया गया?
- संपन्न वर्ग का सवाल: CJI ने कहा कि आरक्षित समुदायों में भी अब कई लोग आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं, ऐसे में क्या ये नियम केवल एकतरफा नहीं हैं?
विवाद की जड़: क्यों हो रहा है ‘काले कानून’ के रूप में विरोध?
UGC द्वारा 13 जनवरी को जारी ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशन्स 2026’ में तीन ऐसे बदलाव किए गए जिनसे सवर्ण और जनरल कैटेगरी के छात्र भड़क उठे:
- झूठी शिकायत पर सजा खत्म: पहले ड्राफ्ट में प्रावधान था कि अगर कोई छात्र गलत मंशा से शिकायत करता है तो उसे सजा मिलेगी, लेकिन फाइनल नियमों में यह हटा दिया गया।
- जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं: शिकायतों की जांच करने वाली ‘इक्विटी कमेटी’ में जनरल कैटेगरी का सदस्य होना अनिवार्य नहीं रखा गया।
- एकतरफा परिभाषा: विरोध करने वालों का आरोप है कि नियमों में जनरल कैटेगरी के छात्रों को ‘स्वाभाविक अपराधी’ (Natural Offenders) मान लिया गया है।
जश्न और प्रदर्शन: राज्यों का हाल
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली:
- यूपी (वाराणसी/बरेली): सवर्ण समाज के छात्रों ने रंग-गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया। वहीं भीम आर्मी ने नियमों पर रोक का विरोध किया।
- बिहार (पटना): राजपूत करणी सेना ने ‘काला कानून वापस लो’ के पोस्टरों के साथ प्रदर्शन किया।
- हरियाणा: मशहूर गायक मासूम शर्मा और खिलाड़ी योगेश्वर दत्त ने भी सोशल मीडिया पर #UGCRollback कैंपेन का समर्थन किया।
- मध्य प्रदेश: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सफाई दी कि उनकी समिति ने ‘झूठी शिकायत पर सजा’ हटाने की सिफारिश नहीं की थी, यह UGC का अपना फैसला था।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का नया ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। 19 मार्च 2026 को अगली सुनवाई होने तक देशभर के विश्वविद्यालयों में 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
सच का समय – विश्लेषण: यह मामला अब केवल छात्रों का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय बनाम समानता के अधिकार की कानूनी जंग बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का दखल यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य का ड्राफ्ट अधिक समावेशी और संतुलित हो।

